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जीबीसीबीए के बारे में

अध्यक्ष का संदेश



स्मृतियों में हमेशा से अंकित... एक सपना... जो वीरता का एक संस्थान बन गया।

GBCBA१२ वर्ष पहले, मैंने एक सपना देखा था, जो मेरे दिल के अपने दिल के बेहद करीब था – वह सपना था, स्वर्गीय घनश्याम बिनानी की स्मृति में घनश्याम बिनानी फाउंडेशन की ओर से बाल वीरता पुरस्कार की स्थापना। घनश्यामजी बच्चों को बहुत प्यार करते थे और अब वही सपना अपने आप में एक संस्थान बन गया है।

बीते वर्षों में हमने देशभर के अनेक बहादुर बच्चों को सम्मानित किया है और वे बच्चे हमारे भीतर भी साहस का भाव जगाते हैं। मुझे गर्व है कि अब यह प्रोजेक्ट उस सपने से कहीं अधिक विशाल बन चुका है।

बिनानी होने के नाते हम हमेशा मानते रहे हैं कि परोपकार की शुरुआत घर से होती है। बिनानी के दरवाज़े से कभी कोई खाली हाथ नहीं लौटा। यह परंपरा अब भी बरकरार है और हमारी आने वाली पीढ़ि‍यां भी इसे जारी रखेंगी। हमारे बाबूजी (सेठ गोवर्धनदासजी) ने जो चैरिटेबल ट्रस्ट स्थापित किया था, वह मेरे पति स्वर्गीय घनश्यामजी बिनानी का शौक बन गया था। व्यवसाय उनकी प्राथमिकता थी, इसके बावजूद उन्होंने ट्रस्ट की गतिविधियों को कभी नज़रअंदाज़ नहीं किया। अनगिनत शैक्षणिक संस्थान, छात्रवृत्तियां, पुस्तकालय, अस्पताल, धर्मशालाएं, समाज भवन और पार्क इसके गवाह हैं।

शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 1969 में मिर्ज़ापुर स्थित जी.डी. बिनानी पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज की स्थापना की गई, जिसके बाद 1998 में घनश्याम बिनानी एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेस की स्थापना हुई और आज दोनों का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है। साथ ही, हर साल नेशनल मेटलर्जिकल इंस्टीट्यूट के एक छात्र को मेटलर्जी के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए स्वर्ण पदक से सम्मानित भी किया जाता है।

हमारे देश का भविष्य हमारे बच्चे ही बनाएंगे। इसलिए शिक्षा और इस पुरस्कार के माध्यम से हम उन्हें जिम्मेदार नागरिक और बेहतर इंसान बनाना चाहते हैं। हमें पूरी उम्मीद है कि हमारे घनश्याम बिनानी फाउंडेशन के जरिए, हम वंचितों और विशेष तौर पर हमारे भविष्य...हमारे बच्चों , के जीवन को बेहतर बना सकते हैं।

पद्मा बिनानी
अध्यक्ष, घनश्याम बिनानी फाउंडेशन

 
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