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दायित्व की विरासत

बिनानी चैरिटेबल बॉडीज़‭ (‬बिनानी कल्याणकारी निकाय‭)



बिनानी के दरवाजे से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटा – यह ऐसी विरासत है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है। बिनानी परिवार को हमेशा से उसकी उदारता के लिए जाना जाता है।

समाज से जो मिला, उसे वापस लौटने के लिए बिनानी परिवार ने अनेक न्यास स्थापित किए। जरूरतमंदों की मदद और अच्छे उद्देश्य में सहयोग देने के लिए 1958 में एक गैर-लाभकारी कल्याणकारी संस्थान, बिनानी चैरिटेबल बॉडीज़ की स्थापना की गई। इस तरह परोपकार का सिलसिला पहले से अधिक व्यवस्थित हो गया।

सेठ गोवर्धनदास बिनानी इसके संस्थापक और स्वार्गीय घनश्यामजी उपाध्यक्ष थे। दरअसल, सेठ गोवर्धनदासजी ने इस लंबी यात्रा की शुरुआत अपनी पत्नी की याद में धर्मशालाएं और पुस्‍तकालय बनवाने के साथ की थी। और अब भी, महेश्वरी समुदाय उन्हें उनकी सच्ची सेवा के लिए याद करता है।

सेठ गार्वधनदासजी की मृत्यु के बाद श्री घनश्याम बिनानी और उनके परिवार ने तीन और न्यास स्थापित किए – मथुरादास गोवर्धनदास बिनानी चैरिटेबल ट्रस्ट, जी.डी. बिनानी चैरिटेबल फाउंडेशन और बी.सी. ट्रस्ट ।

इन चार दशकों में घनश्याम बिनानी फाउंडेशन ने अनगिनत व्यक्तियों की जिंदगी को प्रभावित किया और लाखों लोगों के जीवन को बेहतर बनाया। घनश्याम बिनानी फाउंडेशन का मुख्य केंद्रबिंदु शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज भवन के क्षेत्र रहे हैं।

 
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